छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन कांग्रेस के बहिष्कार पर तीखा बयान दिया है। साय ने कहा कि कांग्रेस लगातार हार के बाद ‘बौखलाई’ हुई प्रतीत होती है और इसी नकारात्मकता के चलते सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर रही है। उन्होंने सरकार के दो वर्ष के रिपोर्ट कार्ड को भी सबके सामने रखा और राज्य की उपलब्धियों को गिनाया।

मुख्यमंत्री के बयान की मुख्य बातें
सीएम साय ने कहा कि सरकार ने नक्सल समस्या से निपटने और विकास के एजेंडे को प्राथमिकता दी है। उन्होंने दावा किया कि नक्सलियों का आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने देश के इस उपद्रव को कमजोर कर दिया है, और राज्य में ’सरेंडर नक्सलियों को पूरा घोषित इनाम मिलेगा’ जैसा संदेश दिया गया है। रिपोर्ट कार्ड में रोजगार, उद्योग, खेल प्रोत्साहन और नक्सल नीति में बदलाव जैसी प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस के बहिष्कार पर साय का आरोप
सीएम साय ने कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय चुनावों में हार का सामना किया है और इसी हार की निराशा के चलते बहिष्कार जैसे कदम उठा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि विपक्ष मजबूत रहे, लेकिन यह उनका निजी निर्णय है।

नक्सल पॉलिसी और सरेंडर का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने नक्सल समस्या पर भी अपनी सरकार की नीति को रेखांकित किया, जिसमें नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास पर जोर है। साय ने स्पष्ट किया कि जो नक्सलिया सरेंडर करते हैं, उन्हें घोषित इनाम राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि मुख्यधारा में लौटने के लिए एक सकारात्मक संदेश मिले।
राज्य सरकार की उपलब्धियाँ
दो साल के अपने कार्यकाल में साय सरकार ने राज्य के विकास, औद्योगिक नीति, खेल प्रोत्साहन, नये रोजगार सृजन और नक्सल नियंत्रण कार्यक्रमों को प्रमुखता दी है। इसी दौरान ओलंपिक में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए विशेष पुरस्कार की घोषणा जैसी घोषणाएँ भी सार्वजनिक की गई हैं।

हालांकि कांग्रेस ने सत्र से बहिष्कार किया है, उनका कहना है कि बहिष्कार का निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और सरकार को विपक्ष की चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए। विपक्ष के अन्य तेवर और प्रतिक्रियाएँ आगामी दिनों में राजनीतिक बहस का विषय बनी रहेंगी।


