छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीन खरीदी-बिक्री और डायवर्सन प्रक्रिया में वर्षों से जारी अवैध वसूली और घूसखोरी पर बड़ा प्रहार किया है। ऋण पुस्तिका के बाद अब भूमि डायवर्सन की प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है, जिससे लोगों को राजस्व अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
सरकार ने डायवर्सन की जटिल और समय लेने वाली व्यवस्था को डिजिटल बनाते हुए इसके लिए नया ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है। नए सिस्टम के तहत भूमि स्वामी सीधे पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे और भू-राजस्व व प्रीमियम की राशि भी ऑनलाइन जमा होगी।

भुगतान के बाद आवेदन स्वतः संबंधित एसडीएम के पास पहुंचेगा। एसडीएम को अधिकतम 15 दिनों में आदेश जारी करना अनिवार्य होगा। यदि तय समय में निर्णय नहीं लिया गया, तो 16वें दिन सिस्टम स्वतः डायवर्सन आदेश जारी कर देगा।
इस बदलाव के लिए सरकार ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (व्यपवर्तित भूमि के लिए भू-राजस्व निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण नियम 2025) का मसौदा जारी किया है। इस पर 15 दिनों तक दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई है, जिसके निपटारे के बाद नियम औपचारिक रूप से लागू होंगे।

फिलहाल डायवर्सन मामलों में 60 दिन की समय-सीमा होने के बावजूद हजारों प्रकरण लंबित हैं और आवेदकों को लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नए डिजिटल मॉडल से प्रक्रिया में तेजी आने के साथ-साथ अनौपचारिक लेन-देन पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
सरकार ने डायवर्सन के लिए प्रीमियम दरें 3 रुपये से 25 रुपये प्रति वर्गमीटर तक तय की हैं। ये दरें क्षेत्र और उपयोग के आधार पर लागू होंगी, जिनमें नगर निगम, नगर पंचायत, ग्रामीण क्षेत्र, आवासीय, कॉलोनी विकास, वाणिज्यिक-औद्योगिक, संस्थागत, स्वास्थ्य सुविधाएं और SEZ शामिल हैं।


