अब नहीं चलेगा ‘फ्लाई एश’ का अव्यवस्थित उपयोग — नियम तोड़ा तो होगी पेनाल्टी, 1,500 रुपये प्रति टन वसूला जाएगा

Jan Mitan
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रायगढ़, 22 दिसंबर 2025: केंद्र और राज्य पर्यावरण नियमों के तहत अब थर्मल पावर प्लांट द्वारा उत्पन्न फ्लाई ऐश (कोयला राख) का उपयोग सुनिश्चित न करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। पर्यावरण विभाग ने निर्देश जारी कर कहा है कि पावर प्लांट से 300 किलोमीटर के दायरे में जो भी निर्माण कार्य या परियोजना हो, वहां उपलब्ध फ्लाई ऐश और उसके उत्पादों का आवश्यक उपयोग करना अनिवार्य होगा। इस नियम का उल्लंघन करने पर प्रत्येक न उपयोग किए गए टन फ्लाई ऐश के लिए 1,500 रुपये की पेनाल्टी वसूली जाएगी। 

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि फ्लाई ऐश उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया जाता है, तो संबंधित एजेंसियां और निर्माणकर्ता इस पर्यावरणीय प्रतिकर (Environmental Compensation) के लिए जिम्मेदार होंगे। भवन निर्माण के मामले में भी निर्धारित मानदंडों के अनुसार निर्मित क्षेत्र के प्रति वर्ग फुट 75 रुपये के हिसाब से अतिरिक्त प्रतिकर लागू किया जाएगा। 

यह कदम फ्लाई ऐश के सही प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। भारत में कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांटों से हर साल करोड़ों टन फ्लाई ऐश का उत्पादन होता है, जो यदि अनुपयोगी रूप में भूमि पर डंप होता है तो वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण का कारण बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे अस्थायी लैंडफिल में न डालकर निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए — जैसे ईंटें, पावेर ब्लॉक, सड़कों में मिश्रण, सीमेंट आदि — जिससे प्रदूषण कम हो और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। 

केंद्र एवं राज्य नियमों के तहत अब तक फ्लाई ऐश के 100 प्रतिशत उपयोग को प्राप्त करने के लिए कई निर्देश और संवाद जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जमीन पर अनुपालन में गिरावट देखी जा रही थी। ऐसे में यह नया दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित करेगा कि थर्मल पावर प्लांटों और स्थानीय परियोजनाओं में पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन हो। 

समाचार तैयार किया गया स्थानीय शासन के दिशा‑निर्देशों और केंद्रीय पर्यावरण मानकों के आधार पर।

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