घोटाले का आरोप, 1.62 करोड़ रु. टॉयलेट खर्च और टेंडर से पहले टेंट, जंबूरी विवाद गरम

Jan Mitan
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बालोद (छत्तीसगढ़) – राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी आयोजन में भारी अनियमितताओं के आरोप उठते ही मामला सरकार और भाजपा के नेताओं के बीच तीखे विवाद में बदल गया है। आयोजन स्थल पर टेंडर पूरी होने से पहले ही टेंट-तंबू निर्माण शुरू होने के दावों से प्रशासन पर सवाल चिन्ह खड़े हो गए हैं।

क्या हुआ खर्च?

• आयोजन में शौचालय, यूरिनल और नहाने की अस्थायी व्यवस्थाओं पर कुल ₹1.62 करोड़ से अधिक खर्च होने का बोझ दर्शाया जा रहा है।

• रिपोर्टों में कहा गया कि 400 सामान्य टॉयलेट के लिए ₹88 लाख, एक वीवीआईपी टॉयलेट पर ₹40,000 प्रति इकाई सहित अन्य महंगे मदों के कारण खपत बढ़ी।

• दस्तावेजों के अनुसार 400 टेंट-तंबू और 2,000 टेंट का उल्लेख है, लेकिन प्रत्यक्ष निरीक्षण में संख्या कम नजर आई, जिससे लाखों रुपये के भुगतान पर疑問 खड़ा हुआ है।

टेंडर से पहले हुआ काम?

आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही टेंट-तंबू का निर्माण शुरू कर दिया गया, जो सरकारी खरीद नियमों के उल्लंघन जैसा दिखता है। इससे खर्च की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठे हैं।

बृजमोहन–गजेन्द्र विवाद

इस खर्च को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर भ्रष्टाचार और नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। बृजमोहन ने आयोजन को स्थगित करने की चेतावनी दी थी और हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।

इसके विपरीत, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सभी खर्चों को सार्वजनिक करने का वादा किया और कहा कि वर्क ऑर्डर और भुगतान विवरण जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए प्रक्रिया की वैधता पर जोर दिया है।

राजनीतिक और प्रशासनिक असर

नेता प्रतिपक्ष समेत विपक्षी दलों ने भी इस मामले पर आयोग की कार्यशैली और नियमों के अनुपालन पर सवाल उठाए हैं। भाजपा के अंदरूनी संघर्ष ने मामले को और अधिक राजनीतिक रूप दे दिया है, जिससे घोटाले की जांच की मांग तेज हो गई है।

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