बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई ने बड़ा मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत एक DRG जवान के मकान सहित 40 घरों को ध्वस्त कर दिया है, जबकि 35 अन्य मकानों को तोड़ने की तैयारी चल रही है।
कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों का दर्द छलक पड़ा। कई लोग रोते-बिलखते हुए प्रशासन से गुहार लगाते नजर आए। पीड़ितों का कहना है कि उनके पास न तो रहने की जगह बची है और न ही सुरक्षित भविष्य। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अगर वे गांव लौटते हैं तो नक्सलियों से जान का खतरा है, जबकि शहर में प्रशासन उनका आशियाना उजाड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास योजना के यह कार्रवाई की गई, जिससे महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए तत्काल राहत और पुनर्वास की मांग की है।
वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के तहत की जा रही है और सभी को पूर्व में नोटिस दिया गया था। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बिना पुनर्वास के बेदखली कितनी मानवीय और सुरक्षित है?
अब यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई बनाम मानवीय संवेदना के रूप में सामने आया है, जिस पर शासन की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


