सरगुजा (छत्तीसगढ़) में जल-जंगल-ज़मीन बचाने का संयुक्त आंदोलन तेज — अंबिकापुर में रैली-आमसभा, आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप

Jan Mitan
2 Min Read

अंबिकापुर, सरगुजा (छत्तीसगढ़) — छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में “जल-जंगल-ज़मीन बचाओ” को लेकर एक बड़े पैमाने पर mobilization हुआ, जिसमें आदिवासी, किसान, ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता खनन परियोजनाओं और जंगलों की कटाई के खिलाफ एकजुट हुए। 

अंबिकापुर के बीटीआई ग्राउंड पर हुई रैली और आमसभा में हजारों लोग शामिल हुए और उन्होंने प्रदेश भर में जारी खनन, औद्योगिक गतिविधियों तथा प्राकृतिक संसाधनों के विनाश को रोकने की मांग की। 

आंदोलन का नेतृत्व हसदेव बचाओ संघर्ष समिति, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन (CBA) तथा अन्य ग्रामीण और सामाजिक समूहों द्वारा किया गया। 

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हनन परियोजनाओं के लिए जल, जंगल और जमीन पर बढ़ते दबाव से न केवल पर्यावरणीय क्षति हो रही है, बल्कि आदिवासी समुदायों के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है, विशेषकर पेसा और वन अधिकार कानून के तहत ग्रामसभा की सहमति लिए बिना निर्णय लिए जाने का आरोप लगाया गया। 

मौजूद लोगों ने कहा कि खनन के कारण हसदेव अरण्य सहित मुख्यपाट, मैनपाट, और वड्राफनगर जैसे इलाकों में जैव विविधता को गंभीर खतरा है, तथा कई खनन परियोजनाओं से आसपास के गांवों के जीवन, कृषि और जल स्रोत प्रभावित होंगे। 

रैली के बाद एक 13-बिंदु मांगपत्र कलेक्टर कार्यालय में सौंपा गया, जिसमें परियोजनाओं की अनुमोदन प्रक्रिया की पारदर्शिता, ग्राम सभा की सहमति का सम्मान, और प्रभावित समुदायों के विस्थापन व मुआवजे के उचित प्रावधानों की मांग शामिल है। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इन पर्यावरणीय और सामाजिक मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर जारी रखा जाएगा। 

Share This Article
Leave a comment