छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर में प्रशासन की बुल्डोज़र कार्रवाई के बाद लगभग 100 से अधिक परिवारों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर व्यापक प्रदर्शन किया, जिससे रायपुर-हैदराबाद मार्ग पर जाम लग गया और यातायात बाधित हो गया।
स्थानीय ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने बस स्टैंड के पीछे बने अस्थायी बस्तियों में बिना वैकल्पिक पुनर्वास व्यवस्था के बुल्डोज़र चला दिए, जिससे दबे-कुचले नागरिकों के घर उजड़ गए और वे खुले आसमान के नीचे आकर रह गए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित लगभग 100 परिवार सड़क पर बैठ गए और नुकसान का मुआवजा देने की मांग की।
प्रदर्शन के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबा जाम लग गया, जिससे भारी वाहनों और यात्रियों को कई किलोमीटर तक रोकना पड़ा। कई यात्री बसें और वाणिज्यिक वाहन मार्ग पर फंसे रहे। विरोध कर रहे लोगों ने कहा कि प्रशासन को पहले उन्हें वैकल्पिक आवास और पुनर्वास का स्पष्ट प्रबंध करना चाहिए था, न कि अचानक बुल्डोज़र कार्रवाई करना।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से प्रत्यक्ष आर्थिक मुआवजा और पुनर्वास की गारंटी की मांग करते हुए उच्च अधिकारियों से तत्काल बातचीत की अपील की है। उन्होंने बताया कि या तो उन्हें उचित नुकसान भरपाई दी जाए या फिर स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए, अन्यथा आंदोलन और तेज़ करने की चेतावनी दी है।
बुल्डोज़र से हटाए गए करीब 55 घरों में से कई ऐसे भी थे, जिनमें सुरक्षा बलों के साथ जुड़े परिवार और नक्सल हिंसा के पीड़ित लोग पहले से रहते थे, जो अन्यथा गांवों से भाग कर आश्रित हुए थे। उन्होंने कहा कि प्रशासन की यह कार्रवाई उन्हें और अधिक असुरक्षा की स्थिति में धकेल रही है।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस के बाद की गई थी, और इसे स्थानीय नियमों के तहत लागू किया गया था। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि लंबे समय से नोटिस दिए जा रहे थे और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। हालांकि, प्रदर्शनकारी मानते हैं कि उन्हें उचित पूर्व सूचना और पुनर्वास योजना नहीं दी गई।
इस घटना से इलाके में सामाजिक तथा प्रशासनिक गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई है और तनाव अभी भी बना हुआ है। उच्च सरकारी स्तर से इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करने की प्रतीक्षा जारी है।


