बिलासपुर में हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे को लेकर प्रारंभिक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की जांच में पाया गया है कि अफसरों की गंभीर लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई। रिपोर्ट के अनुसार, नियमों को दरकिनार करते हुए एक थके हुए और निर्धारित समय से अधिक कार्य कर चुके लोको पायलट को ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी गई थी।

जांच में सामने आया कि संबंधित अधिकारियों ने अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। लोको पायलट को आराम अवधि दिए बिना ट्रेन संचालन की मंजूरी दी गई, जिससे उसकी क्षमता और प्रतिक्रिया समय प्रभावित हुआ। इसी लापरवाही के चलते ट्रेन नियंत्रण से बाहर हो गई और दुर्घटना में कई यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकि कई घायल हो गए।
CRS की टीम ने कहा कि यदि नियमों का पालन किया जाता और अधिकारियों द्वारा समय पर सतर्कता बरती जाती, तो हादसा टल सकता था। जांच में यह भी पाया गया कि स्टेशन और कंट्रोल रूम के बीच संचार में गंभीर कमी थी, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

हादसे के बाद रेलवे प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों और यात्रियों ने दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। रेलवे बोर्ड ने विस्तृत जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित अधिकारियों को हटाने और विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा सिस्टम की खामियों और अनदेखी का नतीजा है। अब सभी की नजरें आगे आने वाली विस्तृत जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो जिम्मेदारी और सुधार के अगले कदम तय करेगी।


