महानदी जल विवाद पर उच्च स्तरीय कमेटी की पहली बैठक 22 को

Jan Mitan
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महानदी जल विवाद फिलहाल ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है, लेकिन इसके समानांतर ओडिशा और छत्तीसगढ़ सरकारों के बीच विभिन्न स्तरों पर बातचीत भी जारी है। विवाद की जटिलता और इससे जुड़ी भावनात्मक संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर यह उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी में बीजेपी, बीजद और कांग्रेस के प्रतिनिधियों के साथ-साथ उन जिलों के विधायक भी शामिल हैं, जहां से महानदी प्रवाहित होती है।

आठ सदस्यीय कमेटी में राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन, उद्योग मंत्री संपदा चंद्र स्वैन, गवर्नमेंट चीफ विजिलेंट सरोज कुमार प्रधान, बीजद विधायक निरंजन पुजारी, संबलपुर विधायक जयनारायण मिश्रा और कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस शामिल हैं। कमेटी महानदी के जल से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा करेगी और तकनीकी व प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को लेकर राज्य सरकार को आवश्यक नीतिगत मार्गदर्शन देगी।

कमेटी के गठन के बाद विधायक जयनारायण मिश्रा ने कहा कि पिछली सरकार का ट्रिब्यूनल जाने का निर्णय गलत था और इस विवाद के समाधान के लिए राजनीतिक पहल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल प्रक्रिया से समाधान में देरी हुई है और मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई इस कमेटी का स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जैसे छत्तीसगढ़ ने महानदी पर बैराज बनाए हैं, वैसे ही ओडिशा में भी हीराकुद डैम के नीचे बैराज बनाए जाने चाहिए।

वहीं, कमेटी की सदस्य सोफिया फिरदौस ने कहा कि नौ वर्षों बाद महानदी विवाद के समाधान के लिए ऐसी उच्च स्तरीय पहल की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कमेटी न्यायिक देरी से इतर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सार्थक समाधान निकालने में सफल होगी।

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