सरकार ने देश के महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों — महंगाई (CPI) और GDP — को मापने के तरीके में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। फरवरी 2026 से ये आंकड़े नई सीरीज और आधार वर्ष के साथ जारी किए जाएंगे, ताकि आर्थिक डेटा ज़्यादा सटीक, भरोसेमंद और वर्तमान अर्थव्यवस्था के अनुकूल हो सके।
सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अनुसार, अब तक महंगाई और GDP के आंकड़े 2011‑12 के बेस ईयर के आधार पर जारी होते रहे हैं — यानी लगभग 14 साल पुराने आंकड़ों पर आधारित डेटा। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की लंबी मांग के बाद इस बेस ईयर को अपडेट करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्य बदलाव के बिंदु:
• CPI (महंगाई) का नया बेस ईयर 2024 होगा, और नई श्रृंखला 12 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।
• GDP तथा राष्ट्रीय लेखा डेटा का नया बेस ईयर 2022‑23 होगा, जिसे 27 फरवरी 2026 से लागू किया जाएगा।
• IIP (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक) के आंकड़े भी मई 2026 से नई श्रृंखला में अपडेट होंगे।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से उपभोग पैटर्न, तकनीकी बदलाव और आधुनिक आर्थिक संरचना को डेटाबेस में बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित किया जा सकेगा। इसके अलावा, महंगाई के कैलकुलेशन में खान‑पान की अधिकता को बदलकर उन वस्तुओं और सेवाओं पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाएगा, जिन पर लोग आज अधिक खर्च करते हैं — जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार मकसद केवल सांख्यिकीय तकनीक में परिवर्तन नहीं है, बल्कि नीतिगत निर्णयों, RBI की ब्याज दर नीतियों और निवेशकों की अपेक्षाओं पर भी असर डालेगा। पुराने आधार वर्षों पर जारी आंकड़ों को कई बार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसमें यह सुझाव दिया गया कि भारत की डेटा प्रणाली दुनिया में इस्तेमाल होने वाले नई पद्धतियों के अनुरूप नहीं थी।
इस बदलाव का सीधा असर आम आदमी की जेब पर नहीं दिखेगा, लेकिन सरकार के मुताबिक महंगाई और विकास के आंकड़े अधिक यथार्थवादी रूप में सामने आने से नीति निर्माण और अर्थव्यवस्था की दिशा में निर्णय और प्रभावी होंगे।


